अदायगी (परफार्मेटिविटी)

अदायगी (परफार्मेटिविटी) एक बहुत शक्तिशाली विचार है जिसका दर्शनशास्त्र, भाषा और समाज विज्ञान में काफी इस्तेमाल किया गया है। इस अवधारणा में इंसानों को ऐसे पात्रों के रूप में देखा जाता है जो कुछ ऐसी खास क्रियाएँ करते हैं जिनसे उनकी पहचान गढ़ी जाती है। मर्द या औरत के रूप में, समलैंगिक या विषमलैंगिक के रूप में, ब्राह्मण या अछूत आदि के रूप में की जानीवाली इन क्रियाओं में सामाजिक कायदे-कानूनों या आदतों पर आधारित उनके रोज़मर्रा के व्यवहार भी शामिल होते हैं।

अदायगी की अवधारणा यह है कि कुछ खास क्रियाओं को बार-बार करने से हम खास तरह के सामाजिक इंसान बन जाते हैं, उसी तरह जैसे किसी नाटक में किया जाता है। नाटक में लिखी जा चुकी पटकथा पर तब तक बार-बार रिहर्सल की जाती है जब तक कि अभिनेता के रूप में हम अपने लिए चुने गए पात्र विशेष के सारे शब्दों और उसकी क्रियाओं को नहीं रट लेते। अगर हम जेंडर के संदर्भ में अदायगी की अवधारणा को देखें तो यह समझ सकते हैं कि जेंडर भी एक अदायगी है। यह भी बार-बार दोहराए जानेवाली क्रियाओं का एक समूह है। मिसाल के तौर पर कुछ क्रियाओं की बार-बार अदायगी, जैसे कोमल स्वर में बोलना, दौड़-भाग नहीं करना, जाँघें सटा कर बैठना, बाल पीछे बाँधकर रखना आदि व्यवहारों से लड़कियाँ लड़कियों के रूप में चिह्नित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया में जेंडर हमारे शरीर पर खुद जाता है। जो भी हमारा शरीर करता है उसमें जेंडर पूरी तरह से रच-बस जाता है।
जेंडर अदायगी के इस सिद्धांत को सूत्रबद्ध करने में नारीवादी विदुषी जूडिथ बटलर का अहम हाथ रहा है। वे जेंडर को इस बात की अभिव्यक्ति नहीं मानतीं कि हम क्या हैं, बल्कि इस बात की अभिव्यक्ति मानती हैं कि हम क्या करते हैं। बटलर के सिद्धांत के अनुसार समलैंगिकता और विषमलैंगिकता जैसी सामाजिक या यौन श्रेणियाँ स्थिर नहीं होतीं। कोई व्यक्ति महज़ खास क्रियाओं को ‘करने’ की अवस्था में होता है, केवल इसी आधार पर औरों को उसे उस खास श्रेणी में देखने और रखने का मौका मिलता है।
(जेंडर और शिक्षा रीडर से अंश)
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s