ललितपुर का मेरा पहला अनुभव

किसी भी चीज़ का पहला अनुभव हमेशा ख़ास होता है। मेरे लिए सहजनी शिक्षा केंद्र (एस. एस. के.), ललितपुर के नए सेंटरों के उद्घाटन का अनुभव भी कुछ ऐसा ही था। मैं डरी-सहमी ललितपुर पहुंची। डरी-सहमी इसलिए क्योंकि निरंतर से यह मेरा पहला फील्ड विजिट था। मुझे वहाँ लोग पसंद करेंगे या नहीं? क्या मैं वहाँ की बोली समझ पाऊँगी? ऐसे कई सवाल मेरे मन में दौड़ लगा रहे थे। मैं तो ललितपुर पहुँचने से एक घंटे पहले ही ट्रेन में उठ बैठी थी।

मगर ललितपुर पहुँचते ही ये सवाल जैसे कहीं छूमंतर हो गए। सह्जनियों यानी एस. एस. के. की टीम का जोश ऐसा है कि उन्हें देखकर हर किसी का मन पूरी लगन से काम करने को चाहता है। जोश के साथ उनका अपने टीम के सदस्यों के प्रति स्नेह मन को छू जाता है। इस जोश ने मुझ पर भी असर दिखाया बस फिर क्या था कार में बैठी अपनी पानी की बोतल और कैमरा लिए, और निकल गयी सह्जनियों के साथ उनके सफ़र पर। हमारा पहला गाँव था, डोंगर कलां और हम उसकी सहरिया बस्ती में पहुंचे। ढोलक को बजा- बजाकर औरतों और लड़कियों को उनके घरों से बाहर आने के लिए प्रोत्साहित किया। एक खूबसूरत से नीम के पेड़ के नीचे अपना सामान पटका और लग गए उस जगह को सुन्दर बनाने में। 10 मिनट और कुछ रंग-बिरंगी पतंगों और पोस्टरों को लगाने के बाद एस. एस. के. ने वहाँ अपनी छाप लगा दी थी। चारों तरफ – “शिक्षा है अनमोल रतन, पढ़ने का सब करो जतन” और “शिक्षा हो या काम की बारी, काहे रहती है पीछे नारी” जैसे नारों के पोस्टर लगे हुए थे। फिर शुरुआत हुयी गानों की:

“पाठशाला खुला दो महाराज

मोरा जीया पढ़ने का चाहे”

2

सह्जनियाँ (और किसी हद तक मैं भी) यह और न जाने ऐसे कितने ही गाने गाती जा रही थीं। उनको सुनकर तो कोई भी प्रेरित हो जाता! जोश और उम्मीद से भरे इन गानों को गाँव की औरतें भी साथ-साथ गा रहीं थीं और तालियाँ बजा रहीं थीं। जो ज़्यादा उत्साहपूर्ण औरतें थीं वो ढोलक की धुन पर नाच भी रहीं थीं। यह देख मुझे ताज्जुब हुआ कि गाँव के बूढ़ी औरतों में ज़्यादा आत्मविश्वास था और वे खुलकर घुल- मिल रहीं थीं।

हँसी-मज़ाक करके, फड़ का इस्तेमाल करके और औरतों को इस बात का यकीन दिलाकर कि पढ़ाई चाहे जब भी की जाये वह हमारे साथ हमेशा रहती है और हरदिन के कामों में उसका इस्तेमाल बहुमूल्य है, हमने हर गाँव में सेंटर का उद्घाटन किया।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s