सीखेंगे और सिखाएंगे: साक्षरता केंद्र की टीचर्स की ज़िन्दगी

हमारी संस्था प्रौढ़ महिलाओं के साथ शिक्षा और साक्षरता का काम कई सालों से करती आ रही है, इस कार्यक्रम के तहत महिलाएँ अपने ही गाँव में खुले हुए साक्षरता केंद्र में रोज़ाना आकर अक्षर, मात्रा, गणित की क्षमताओं को सीखने के साथ साथ बहुत से मुद्दों पर समझ बनाने का काम करती हैं। इन महिलाओं को सिखाने का काम सेंटर की टीचरों का होता है, जो उसी गाँव से या पास के गाँव से आती हैं और हर रोज़ दो से तीन घंटे महिलाओं के साथ बिताती हैं।

This slideshow requires JavaScript.

दोस्तों, सेंटर की महिलाओं की तरक्की, बदलाव  और आत्मविश्वास की कहानियाँ तो हमें बहुत सुनने को मिलती हैं, लेकिन आज हम आपसे बात करना चाहते हैं उन नायिकाओं के बारे में जो यह तरक्की महिलाओं के लिए मुमकिन बना पाती हैं। साक्षरता कार्यक्रम से जुड़ी अलग अलग राज्यों में काम कर रही संस्थाओं की फील्ड को विजिट करते हुए हम टीचरों से भी लगातार चर्चा करते रहे हैं कि आप खुद के अंदर क्या बदलाव देखती हैं? टीचर अपने अंदर आए बदलावों को जिस तरह से बताती हैं वो बाहरी दुनियाँ के लिए शायद मामूली शब्द होंगे, लेकिन उनकी जिंदगी में वो बहुत बड़ी उपलब्धि और बदलाव है। टीचरों के जो अनुभव हैं वह उनकी गतिशीलता से लेकर उनके आत्मविश्वास की कहानियाँ बताते हैं.

देखा गया है कि कई टीचरों की यह पहली नौकरी होती है, और क्योंकि उनके पास पहली बार अपने खुद के कमाए पैसे हाथ में आते हैं, यह उनके लिए, बेहद ख़ुशी का स्त्रोत होता है।

इस समाज में जहाँ महिला को बचपन से बताया जाता है कि उसकी असली जगह घर पर है, उसका काम बाहर नौकरी करना नहीं। उसको पैसे के लिए अपने पिता या पति पर ज़िन्दगी भर निर्भर रहना होगा, अपने बलबूते पर पैसे कमा  पाना आत्मनिर्भरता व आत्मविश्वाश पैदा करता है। टीचरें हमें बहुत उत्साह और ख़ुशी के साथ बताती हैं कि उन्होंने अपनी पहले वेतन से अपने लिए और अपने परिवार के लिए किन किन चीज़ों की खरीदारी की। हमें कई टीचरें ऐसी भी मिलीं जिन्होंने अपने वेतन के पैसों को अपनी पढाई पूरी करने के लिए और आगे, बी. एड और एम. एड करने के लिए इस्तेमाल किया है और कइयों ने अपने लिए मोबाईल, साईकिल, स्कूटी भी खरीदी है।

सेंटर में हर रोज 4 से 5 घंटे देना और अलग अलग मीटिंगों और ट्रेनिंग के लिए घर छोड़ कर पूरे पूरे दिन, और कभी कभी कुछ दिनों के लिए बाहर रहना, टीचरों के लिए बहुत कठिन रहा है। वो बताती हैं कि शुरू शुरू में तो घरवाले और गाँववाले उनपर शक करते थे, कई बार ट्रेनिंग सेंटर में पूरे दिन साथ रह कर तसल्ली किया करते थे कि किस तरह के लोगों का वहाँ आना जाना है। कई बार टीचरों को अपने घर में हिंसा का भी सामना करना पड़ा। समय के साथ धीरे धीरे इन सब चीजों में बदलाव आया। कार्यक्रम से जुड़कर टीचरों को बाहर निकलने की आज़ादी मिली, दुनिया को अपनी आँखों से देखने और समझने का नजरिया मिला।

महिलाओं के मुद्दों पर बात कर पाना और अपनी पहचान बना पाना  उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। ऐसा इसलिए भी था क्योंकि टीचरें उसी समुदाय से हैं, उनकी भी भी समाज और परिवार में वही चुनौतियाँ हैं जो सेंटर में पढ़नेवाली हर महिला की हैं।  

उनके ऊपर भी काम और घरवालो का उतना ही दबाव और रोक टोक है जितना और महिलाओं पर। इन सभी चुनौतियों से आगे बढ़कर आज जब वे नौकरी कर पा रही हैं तो उनकी खुशी उनकी बातो में और चेहरे पर दिखाई देती है।

टीचरों का एक महत्त्वपूर्ण अनुभव यह भी रहा है कि सेंटर को चलाते चलाते और महिलाओं के साथ काम करते हुए उनकी समुदाय के अन्य लोगों जैसे पुरुषों, प्रधानों और सरकारी ऑफिसरों से बात करने की क्षमता बढ़ी है। काफी सारी टीचरें हमें बताती हैं कि सेंटर में पढ़ाने की वजह से वे पुरुषों और ऊँचे पदों पर मौजूद व्यक्तियों से बेझिझक बात कर पाती हैं।  

सेंटर चलाने की वजह से टीचरें सिर्फ बाहर के लोगों से ही नहीं, बल्कि घर पर भी आत्मविश्वास से बात कर पाती हैं। वे सवाल कर पाती हैं। और सही गलत पर अपने विचार रख पाती हैं। कई टीचरों से हमने सुना है कि पहले घर पर वे अपनी बात आसानी से रख नहीं पातीं थीं या उनको अपनी बात बोलने में डर लगता था, मगर अब वे सहमी नहीं रहती, अगर उनको अपनी बात कहनी है तो बेझिझक कह पाती हैं और उनकी बात सुनी भी जाती है।

टीचरें जब हमउम्र या अपने से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को पढ़ाती हैं, तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। और यह भी एक सच्चाई है कि कुछ टीचर  टीचरें पढ़ाने से पहले अपनी पढाई को दोहराने का काम करती हैं ताकि वे महिलाओं को एक ठोस रूप से पढ़ा पाएँ। इस तरह न केवल टीचरें सिखाने का काम करती हैं पर सिखाने की प्रक्रिया के साथ ही साथ उनकी खुद की क्षमताएँ भी बढ़ती हैं।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s