हाइपेशिया

nir2हाइपेशिया (चैथी सदी) मिस्र के एलेक्सेन्ड्रिया शहर में रहती थी। जब उसका जन्म हुआ तो उसके पिता ने उसे हर संभव शिक्षा देने का निर्णय लिया। हाइपेशिया ने गणित, भाषा, विज्ञान और दर्शनशास्त्र की शिक्षा ली। उसने तैरना, घुड़सवारी करना और पहाड़ों पर चढ़ना भी सीखा। जब उसके पिता को लगा कि ऐलेक्सेन्ड्रिया में उसके सीखने के लिए कुछ नहीं बचा है तो उन्होंने उसे ग्रीस और इटली देशों में पढ़ने भेजा। हाइपेशिया 10 साल तक यूरोप के विभिन्न देशों में घूमी और उस समय के मशहूर गणितिज्ञों और दर्शनशास्त्रियों से शिक्षा प्राप्त की। जब वह वापस लौटी तो उसे ऐलेक्सेन्ड्रिया के पुस्तकालय में नौकरी मिल गई। उसने गणित, विज्ञान और खगोलशास्त्र पढ़ाना शुरू कर दिया और इन विषयों पर कई किताबें भी लिखीं। हाइपेशिया को खगोलीय यंत्र बनाने में विशेष रुचि थी। उसने ऐसा यंत्र बनाया जिससे तारों की सही-सही स्थिति आँकी जा सकती थी। यह यंत्र नाविकों के लिए वरदान साबित हुआ। वे इसका प्रयोग कर तारों की स्थिति से समुद्र में रास्ता खोज लेते थे। हाइपेशिया ने खुद भी इसका प्रयोग कर तारों की स्थिति की गणना की। उसने इन आँकड़ों की सूचियाँ बनाकर प्रकाशित कीं। इन सूचियों का प्रयोग नाविकों और खगोलविदों ने आगे 1200 साल तक किया।
हाइपेशिया की लोकप्रियता बढ़ती गई। उसके विद्यार्थी तो जैसे उसकी पूजा ही करने लगे थे। उसने धर्म का खण्डन किया और अपने भाषणों द्वारा लोगों को सोचने पर मजबूर किया। उसने कहा कि गलत सोचना, बिल्कुल न सोचने से कहीं अच्छा है। उसने यह भी कहा कि अंधविश्वासों को सच के रूप में पढ़ाना सबसे बुरा है। उसकी बातों ने धर्मगुरुओं को बहुत नाराज़्ा कर दिया। एक ईसाई धर्मगुरु के भड़काने पर कट्टरपंथियों ने उसे राह चलते घेर लिया और तरह-तरह की यातनाएँ देते हुए मार डाला।

Mort_de_la_philosophe_Hypatie

स्रोत : निरंतर प्रकाशन – युवा पिटारा श्रंखला की किताब ‘रोशनी के द्वीप’

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