दीदी की शादी

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निरंतर, शिक्षा और जेंडर पर काम करने वाले एक समूह के रूप में बाल विवाह या कम उम्र में शादी के मुद्दे से कई बार रूबरू हुआ लेकिन इसे महिलाओं के साथ जुड़ी जेंडर की हकीकतों के संदर्भ में ज़्यादा देखा गया, बाल विवाह के मुद्दे की तरह कम। आज बदलते सामाजिक व आर्थिक परिवेश में हमें लगा कि बाल विवाह अथवा कम उम्र में शादी के मुद्दे को नारीवादी नज़रिए से समझने और विश्लेषित करने की ज़रूरत है। इसके लिए निरंतर ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘अर्ली और चाइल्ड मैरिजः ए लैण्डस्केप एनालिसिस’, नाम से अध्ययन किया। 
अध्ययन करने के लिए हमने सात राज्यों और लगभग 19 संस्थाओं का दौरा किया। जिसके अंतर्गत इस मुद्दे से जुड़े विभिन्न लोगों जैसे, युवा लड़के-लड़कियाँ, माता-पिता, पंचायत सदस्य, प्रशासन अधिकारी, स्वयं सहायता समूहों इत्यादि से बातचीत की। इसके अलावा एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन भी आयोजित किया जिसमें 38 संस्थाओं से 42 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। साथ ही इस क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों तथा अन्य क्षेत्र के विशेषज्ञों जिनका इस मुद्दे से जुड़ाव बनता है उनसे व्यक्तिगत साक्षात्कार किए व जानकारियाँ इकट्ठी कीं।
बाल विवाह या कम उम्र में शादी पर हमारी जो समझ बनी उसे कहानी के रूप में पिरोकर आपके सामने लाए ‘पंख होते तो उड़ जाती’ पुस्तिका में।  आइये पढ़ें इस पुस्तिका से एक अंश: 
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आज रूबी को मम्मी ने स्कूल नहीं जाने दिया, ‘‘मौसी के घर जाना है उनकी, बेटी की शादी है।’’ एक तो उसको गुस्सा आ रहा था कि मम्मी ने स्कूल नहीं जाने दिया, दूसरा रूही की शादी है ये जानकर तो जैसे उसके तन-बदन में आग लग गई। फट पड़ी एक दम मम्मी के ऊपर, ‘‘क्या ज़रूरत है इतनी जल्दी शादी की। अभी मुश्किल से 16 साल की ही तो हुई है।’’ रूही रूबी से एक साल ही बड़ी है। रूही के कारण ही उसका नाम रूबी पड़ा। दोनों बहनें एक साथ खेलकर बड़ी हुई हंै। अब उसकी शादी हो रही है और वो हमेशा के लिए ससुराल चली जाएगी। ये सोचकर अब उसे गुस्से के साथ-साथ दुख भी हो रहा है।
वो जाकर ज़रूर रूही से बात करेगी और पूछेगी कि उसने इन्कार क्यों नहीं किया शादी से। लेकिन अभी तो वो अपनी भड़ास मम्मी पर ही निकाल रही है। ‘‘क्यों उसकी पढ़ाई होने तक इंतज़ार नहीं कर सकते मौसी-मौसा?’’ उसने तीखे स्वर में मम्मी से पूछा। उन्होंने थोड़ा हँसते हुए कहा, ‘‘तुम क्यों इतनी परेशान हो! वो कोई दूध पीती बच्ची नहीं है, दो महीने में 16 की पूरी होकर 17वें में लग जाएगी। एक अच्छा लड़का मिल गया है रूही को भी कोई एतराज़ नहीं है।’’ रूबी बिल्कुल नहीं मान सकती थी कि इसमें रूही की भी इच्छा है। मौसा-मौसी अपना बोझ उतारने के लिए ऐसा कर रहे हैं, ये मानते हुए वो मम्मी से आगे बहस करने लगी। इतनी देर से दोनों की बातें सुन रहे पापा ने थोड़ा झिड़क कर कहा, ‘‘ये क्या तुम दोनों में बहस चल रही है? तबसे सुन रहा हूँ।’’ इतना सुनकर मम्मी तो सहम गईं लेकिन रूबी इतनी आसानी से मानने वाली नहीं थी। फुसफुसा कर मम्मी से बोली, ‘‘मैं तो ज़रूर मौसी से बात करूँगी और रूबी से भी। उसका क्या दिमाग खराब है जो कि इस तरह की बातें कर रही है।’’ मम्मी अब और इस बात को बढ़ाना नहीं चाहती थीं, सो जान छुड़ाने के लिए कह दिया, ‘‘जो मन में आए करना अभी तो जाओ, वरना हम दोनों की शामत आएगी।’’
मौसी के घर पहुँचते ही वो भागी रूबी से मिलने के लिए लेकिन मौसी ने बताया कि वो अपनी सहेली के घर गई हुई थी। रूबी के अन्दर तो भुकंप मचा हुआ था और वो अपनी बात कहे बिना अब रह नहीं सकती थी, अपने गुस्से को थोड़ा दबाते हुए लाड से बोली, ‘‘मौसी क्यों कर रही हो दीदी की शादी? अभी तो उनकी उम्र 18 से कम है।’’ मौसी उसकी बात सुनकर हँसते हुए बोलीं, ‘‘और अगर 18 की होती तो क्या होता? उसका शरीर मज़बूत हो जाता, बच्चे जनने के लिए, बच्चे स्वस्थ होते, ये ही बताएगी न तू मुझे। पिछले हफ्ते एक संस्था वाले भी आकर यही बताकर गए हैं।’’
रूबी का मुँह अब देखने लायक था, वह नहीं जानती थी कि मौसी को यह सब बातंे पता हंै। फिर भी रूही की शादी 18 से पहले कर रही हैं। रूबी ने इस पर कहा, ‘‘सब जानती हो तो ऐसा क्यों कर रही हो?’’ मौसी थोड़ा गंभीर होते हुए बोलीं, ‘‘देख बिटिया हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि बेटी को घर बिठा कर बड़ी उम्र में ज़्यादा दहेज देकर शादी करें। और फिर लड़के कौन सा गली-गली मिलते हैं। किस्मत से अच्छा लड़का मिल गया है, उसे भी पसंद है तो फिर क्या फर्क पड़ता है एक दो साल से। लेकिन अगर इससे न किया तो फिर न जाने ऐसा अच्छा रिश्ता कब मिले। और फिर हम कौन सा उसकी शादी दस साल में कर रहे हैं जो तुम इतना परेशान हो।’’
अब तो रूबी का जैसे सब्र का बाँध टूट गया। गुस्से से बोली, ‘‘क्या मतलब है मौसी, 10 साल में नहीं कर रहीं? 15-16 साल भी कोई शादी की उम्र नहीं है। ये उम्र है पढ़ने की, अपनी ज़िंदगी बनाने की, अपने भविष्य की तैयारी करने की।’’ इस पर मौसी ने तुरंत नहले पे दहला मारा, ‘‘वो ही तो कर रही हूँ-भविष्य की तैयारी। शादी ही उसका भविष्य है।’’ रूही यह सुनकर अन्दर तक सिहर गई। उसने कभी नहीं सोचा कि शादी ही उसका भविष्य है लेकिन उसके मम्मी-पापा और आस-पास के सभी लोग शादी को ही एकमात्र भविष्य मानते हैं।
रूबी ने मन ही मन ठाना कि वो रूही से इस बारे में बात करेगी। वो तो नए ज़माने की है, वो ज़रूर समझेगी कि रूबी क्या कहना चाहती है। रात को आखिर दोनों बहनें साथ बैठीं तो रूबी को मौका मिल ही गया बात करने का।
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