जानिये सावित्रीबाई फुले के जीवन से जुड़ी 7 बातें

सावित्रीबाई फुले का नाम कितनी ही बार शिक्षा या फिर नारीवादी मुद्दों के बारे में बात करते हुए आता है। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर लड़कियों की शिक्षा तक पहुँच बनाई, जाति प्रथा और जेंडर के आधार पर भेदभाव का विरोध किया, और अपने समय में प्रचलित कई पुराने कायदों को चुनौती दी। उनकी सोच सिर्फ उनके काम में नहीं, बल्कि उनकी पूरी ज़िन्दगी में झलकती है। आइये सुलझाते हैं उनके जीवन के बारे में कुछ पहेलियाँ और जानते हैं उन्हें और बेहतर तरीके से। Continue reading

Chedkhani: The Blurry Lines of Consent and Youth

Chedkhani, for me, was always a form of sexual harassment with terrible consequences on young women’s mobility where they might be forced to discontinue their education, be married off at an early age or face severe violence. But my idea of chedkhani got challenged during an interaction with the girls of our learning centre at Khanpur. While waiting at the centre for other girls to arrive, Roshni (name changed) came and said “Didi yesterday I was going to the park and at the entrance of the park a few boys were sitting. They asked for my name and address but I aggressively retorted and shooed them away”. Hearing this, other girls also jumped to share their experiences and joined the conversation. The most interesting part was that everyone had different ways of looking at such incidents. For some it is scary, but for some it is simultaneously a way of getting attention as is exemplified by Anjali (name changed), “when someone comments I start running hurriedly to avoid the boys but I also feel that I am looking good and at least somebody has noticed me”.

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शिक्षा और स्वतंत्रता की तलाश में

दिल्ली की अलग अलग पुनर्वासित कॉलोनियों में परवाज़ अडोलोसेंट सेंटर फॉर एजुकेशन (PACE) प्रोजेक्ट के तहत ड्रॉपआउट किशोरियों को साक्षर करने के लिए लर्निंग सेंटर खोले गए हैं. पढ़ाई के अलावा किशोरियों को यह भी मौक़ा दिया जाता है कि वो अपनी जानकारी, अपनी समस्याओं और ज्ञान को लिखित रूप दे सकें. इसके लिए सेंटर में सभी किशोरियां मिलकर ब्रॉडशीट तैयार करती हैं. समूह में किशोरियों को अपनी ज़िन्दगी के किसी मुद्दे या पहलू को लेकर ब्रॉडशीट बनानी होती है. उस मुद्दे पर किशोरियां आपस में चर्चा करती हैं. फिर सभी अपने अपने मनपसंद तरीकों और रंगों से अपने लेख लिखती हैं और सजाती हैं. कई किशोरियां अपने लेख से जुड़े चित्र भी बनाती हैं. ब्रॉडशीट के नाम से लेकर उसकी कलाकारी इत्यादि की ज़िम्मेदारी खुद वही निभातीं हैं.

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Tackling Gendered Violence: Empowering Girls Through Education

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After long years of struggle by common people, various civil society organisations, activists and researchers working in the field of education, Right to Free and Compulsory Education (RTE) Act 2009 was passed by the Parliament and implemented across India. According to this Act, all children between the age group of 6 to 14 years are able to access free education as their right, irrespective of their gender, caste, class, region and religion. RTE Act 2009 has its own advantages and challenges at the ground level, but it has also ignored vital questions linked with education of girls above the age of 15 years or who have never been to schools, both in rural and urban areas.

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निरंतर की एक और पहल: दक्षिण पुरी में लर्निंग सेंटर की शुरुआत

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निरंतर द्वारा परवाज़ अडोलसेंट सेंटर फॉर एजुकेशन (PACE) नामक प्रोजेक्ट के तहत खोले गए दो सेंटरों की कामयाबी के बाद अब संजय कैंप (दक्षिण पुरी) में एक नया लर्निंग सेंटर खोला गया है. एक्शन इंडिया की साझेदारी से यह सेंटर दिल्ली के संजय कैंप की ऐसी किशोरियों के लिए है जिनका किन्हीं कारणों से स्कूल छूट गया है.

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