The Myth of a ‘Working’ Woman

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For many this would not appear to be a myth, but a by-product of the progressive Bharat. As the Labor day is approaching, we decided to break down the word ‘work’, in context of a woman, and explore its linkages with the role of gender.

If we see the definition of ‘work’, it says that,

“noun. activity involving mental or physical effort done in order to achieve a result.”

Whereas, the word ‘working’ is defined as,

“adjective. having paid employment.”

This clear yet unacknowledged distinction is not just restricted to dictionaries, but can also be seen subtly woven in the functioning of our society and its gender roles.

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मज़दूर दिवस और समान मज़दूरी कानून

समान मज़दूरी कानून होने के बावजूद भी हमारे देश में महिलाओं को पुरुषों  से कम मज़दूरी मिलती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पुरुषों को अगर 100 रुपए मिलते हैं तो महिलाओं को केवल 70 रूपए। गांवों में तो इससे भी कम मज़दूरी मिलती है।

काम की पूरी मज़दूरी मिलनी चाहिए। काम चाहे महिला करे या पुरुष। मज़दूरी दिए बिना कोर्इ भी किसी से काम नहीं करा सकता। आमतौर पर महिलाओं को पुरुषों से कम मज़दूरी दी जाती है। इसलिए सरकार ने समान मज़दूरी का कानून बनाया।

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The Youth, Sexuality in Concept, and Our Rights

In the month of February, Nirantar, a center for Gender and Education conducted its Yuva, Yaunikta, and Adhikaar course 2016, a seven day residential training. The venue was Delhi and involved participants from all over the country. Soon after the training, we got a chance to interview the people behind the training this year, to know more about this course. Meet Apeksha, Ipsita, and Priya – aka the Early Marriage, Young People, and Empowerment team at Nirantar.

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“युवा, यौनिकता, और अधिकार” कोर्स, 2016

 

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निरंतर की ओर से सलाम!

हमें आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि निरंतर संस्था 23 से 29 फरवरी, 2016 तक युवा, यौनिकता, और अधिकार पर आवासीय कोर्स (हिन्दी एवं अंग्रेज़ी में) आयोजित कर रही है।

आवेदन पत्र भरकर भेजने की आखि़री तारीख 30 जनवरी 2016 है। आवेदन पत्र डाउन्लोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

निरंतर जेंडर और शिक्षा का सन्दर्भ समूह है और अपनी नारीवादी सोच के साथ महिला मुद्दों पर 1993 से कार्यरत है। पिछले 10 सालों से निरंतर राजनीतिक और सकारात्मक नज़रिए से यौनिकता पर क्षेत्रीय स्तर पर नारीवादी संस्थाओं के साथ काम कर रहा है।

2014 में निरंतर ने जल्द और बाल विवाह पर अध्ययन किया। इस अध्ययन में जल्द और बाल विवाह को नारीवादी नज़रिए से देखा गया और इस प्रथा के मूल कारणों को समझने का प्रयास किया गया। मुद्दों को ‘शादी की उम्र’ के बदले शादी की केन्द्रीयता और अन्य सामाजिक ढाँचों जैसे जेंडर, यौनिकता, वर्ग, जाति और धर्म से शादी के जुड़ाव के नज़रिए से समझा गया।

कोर्स में इस अध्ययन से प्राप्त सीख जोड़ी जाएगी और प्रयास रहेगा कि जेंडर, यौनिकता और शादी की केन्द्रीयता पर प्रतिभागी संस्थाओं के साथ साँझा समझ बनाएँ। साथ ही इन मुद्दों को समुदाय तक कैसे ले जाएँ, वहाँ आने वाली चुनौतियों और उनके निवारणों पर भी बात होगी।

कोर्स किसके लिएः

> यह कोर्स उन सभी संस्थाओं के लिए है जो सामुदायिक स्तर पर यौनिक और प्रजनन स्वास्थय और
अधिकारों पर काम कर रही हैं, युवाओं के साथ काम कर रहे समुदाय/संस्थाएँ, और इन्हीं मुद्दों पर
प्रशिक्षक, संदर्भ व्यक्ति, परामर्शदाताओं के रूप में काम कर रहे व्यक्ति भी आवेदन भर सकते हैं।
> कोर्स की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक (ग्रेजुएट) है और काम करने का अनुभव कम से कम 4 साल होना चाहिए।
> इस कोर्स में महिला, पुरुष, और ट्रांसजेंडर शामिल हो सकते हैं।
> प्रतिभागियों को हिन्दी/अंग्रेज़ी पढ़ना-लिखना आना चाहिए।

कोर्स की व्यवस्था और खर्च:

> कोर्स दिल्ली में होगा।
> प्रतिभागियों को आने-जाने का खर्च खुद वहन करना होगा।
> रहने व खाने की व्यवस्था निंरतर द्वारा की जाएगी।
> इस कोर्स के लिए पंजीकरण शुल्क (रजिस्ट्रेशन फीस) नहीं है।

आप हमें नीचे दिए गए पते पर आवेदन पत्र भेज सकते हैं। या nirantar.mail@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।
निंरतर के बारे में और जानने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.nirantar.net  पर जा सकते हैं।

निंरतर संस्था का पताः
निरंतर: जेंडर और शिक्षा संदर्भ समूह, बी-64, दूसरी मंजि़ल, सर्वोदय एन्क्लेव, नई दिल्ली-110017
फोन नं.: (91-11) 26966334, फैक्सः (91-11) 26517726.

You’re a Woman? Why?

Nearly a month after the first  Yuva, Yaunikta aur Adhikar Course and we are still riding the wave of excitement and stimulation. The hang-over, endless questions, with the struggle to find an answer, and the itch to write about it, is an over-whelming feeling. The first session in the course was on Gender. The common understanding with which we started the session was that the word gender and woman are not synonyms to each other, that it is a social construct which is maintaining the power relations and patriarchy at a structural level. Additionally, it was made clear that gender is a structure with its own set of norms that  if broken are met with punishments and if followed are met with rewards of respect and social standing.

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