शिक्षा और स्वतंत्रता की तलाश में

दिल्ली की अलग अलग पुनर्वासित कॉलोनियों में परवाज़ अडोलोसेंट सेंटर फॉर एजुकेशन (PACE) प्रोजेक्ट के तहत ड्रॉपआउट किशोरियों को साक्षर करने के लिए लर्निंग सेंटर खोले गए हैं. पढ़ाई के अलावा किशोरियों को यह भी मौक़ा दिया जाता है कि वो अपनी जानकारी, अपनी समस्याओं और ज्ञान को लिखित रूप दे सकें. इसके लिए सेंटर में सभी किशोरियां मिलकर ब्रॉडशीट तैयार करती हैं. समूह में किशोरियों को अपनी ज़िन्दगी के किसी मुद्दे या पहलू को लेकर ब्रॉडशीट बनानी होती है. उस मुद्दे पर किशोरियां आपस में चर्चा करती हैं. फिर सभी अपने अपने मनपसंद तरीकों और रंगों से अपने लेख लिखती हैं और सजाती हैं. कई किशोरियां अपने लेख से जुड़े चित्र भी बनाती हैं. ब्रॉडशीट के नाम से लेकर उसकी कलाकारी इत्यादि की ज़िम्मेदारी खुद वही निभातीं हैं.

2

Continue reading

निरंतर की एक और पहल: दक्षिण पुरी में लर्निंग सेंटर की शुरुआत

1

निरंतर द्वारा परवाज़ अडोलसेंट सेंटर फॉर एजुकेशन (PACE) नामक प्रोजेक्ट के तहत खोले गए दो सेंटरों की कामयाबी के बाद अब संजय कैंप (दक्षिण पुरी) में एक नया लर्निंग सेंटर खोला गया है. एक्शन इंडिया की साझेदारी से यह सेंटर दिल्ली के संजय कैंप की ऐसी किशोरियों के लिए है जिनका किन्हीं कारणों से स्कूल छूट गया है.

Continue reading

“कौन सी आज़ादी मांग रहे हो?” – Pinjra Tod Strikes Back!

Their fight has been lately catching national attention, with support pouring in from feminist groups and individuals across the country. But they have continued to fight and march against discrimination and sexism for some time now.

4

In their latest march against student political group ABVP, they are not just tackling college politics but confronting a Patriarchal structure, especially in university campuses.

Here are a few slogans on what their fight is about and against.

3

2

#pinjratod is an autonomous collective effort to ensure secure, affordable and not gender-discriminatory accommodation for women students across Delhi.

The Myth of a ‘Working’ Woman

kahtika1

For many this would not appear to be a myth, but a by-product of the progressive Bharat. As the Labor day is approaching, we decided to break down the word ‘work’, in context of a woman, and explore its linkages with the role of gender.

If we see the definition of ‘work’, it says that,

“noun. activity involving mental or physical effort done in order to achieve a result.”

Whereas, the word ‘working’ is defined as,

“adjective. having paid employment.”

This clear yet unacknowledged distinction is not just restricted to dictionaries, but can also be seen subtly woven in the functioning of our society and its gender roles.

Continue reading

सीटी बजी खलबली मची

एक थी चंचल राजकुमारी, महलों की रौनक सबकी दुलारी,
शौक था उसका सीटी बजाना, मीठी धुन में गाना गाना।
Image
राजा रानी को चिंता सताती, सीटी की धुन कभी न भाती,
लडकी की जाति है उसने पायी, फिर भी लाज कभी ना आयी।

Continue reading