Experiences and Learnings from a Conference on Sustainable Development through Multilingual Education- Part 2

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This is the second part of this article where Prarthana shares her experiences and learnings at the 5th International Conference on Language and Education at UNESCO, Bangkok, where we presented a paper on ‘Breaking the Barriers of Languages in India’.

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Experiences and Learning from a Conference on Sustainable Development through Multilingual Education- Part 1

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Nirantar recently participated in the 5th International Conference on Language and Education at UNESCO, Bangkok, where we presented a paper on ‘Breaking the Barriers of Languages in India’. One of the participants from Nirantar, Prarthana, has described her experiences below of being a part of this platform and has shared her learning from this space.

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छेड़खानी समझने के लिए समझें चाहत, प्यार, और इच्छाओं को

निरंतर में पिछले एक साल से हम एक कार्य-शोध कर रहे हैं। इस कार्य-शोध की कल्पना 2014 में हुई थी जब हमने कम उम्र में विवाह और बाल विवाह पर एक अध्ययन किया था और यह पाया था कि युवाओं की ज़िंदगी से जुड़े इस मुद्दे की चर्चाओं और काम में युवाओं का आवाज़ ग़ायब हैं। युवा जेंडर, यौनिकता, और शादी के बारे में क्या सोचते हैं और इनका जुड़ाव जाति, वर्ग, पितृसत्ता, धर्म की व्यवस्था से कैसे समझते हैं यह व्यक्त करने के लिए हम एक मंच तैयार करना चाहते थे। हमने थिएटर, खास कर “थिएटर ऑफ़ द ओप्प्रेस्सेड” की तकनीकों का इस्तेमाल करने का प्रयास किया है। रिसर्च के दरमियान हमने राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में युवाओ के साथ कार्यशालाएं की हैं। यह ब्लॉग पोस्ट ऐसी एक कार्यशाला में बताई गई घटना और उससे शुरू हुई चर्चा के बारे में है।
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शिक्षा और स्वतंत्रता की तलाश में

दिल्ली की अलग अलग पुनर्वासित कॉलोनियों में परवाज़ अडोलोसेंट सेंटर फॉर एजुकेशन (PACE) प्रोजेक्ट के तहत ड्रॉपआउट किशोरियों को साक्षर करने के लिए लर्निंग सेंटर खोले गए हैं. पढ़ाई के अलावा किशोरियों को यह भी मौक़ा दिया जाता है कि वो अपनी जानकारी, अपनी समस्याओं और ज्ञान को लिखित रूप दे सकें. इसके लिए सेंटर में सभी किशोरियां मिलकर ब्रॉडशीट तैयार करती हैं. समूह में किशोरियों को अपनी ज़िन्दगी के किसी मुद्दे या पहलू को लेकर ब्रॉडशीट बनानी होती है. उस मुद्दे पर किशोरियां आपस में चर्चा करती हैं. फिर सभी अपने अपने मनपसंद तरीकों और रंगों से अपने लेख लिखती हैं और सजाती हैं. कई किशोरियां अपने लेख से जुड़े चित्र भी बनाती हैं. ब्रॉडशीट के नाम से लेकर उसकी कलाकारी इत्यादि की ज़िम्मेदारी खुद वही निभातीं हैं.

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निरंतर की एक और पहल: दक्षिण पुरी में लर्निंग सेंटर की शुरुआत

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निरंतर द्वारा परवाज़ अडोलसेंट सेंटर फॉर एजुकेशन (PACE) नामक प्रोजेक्ट के तहत खोले गए दो सेंटरों की कामयाबी के बाद अब संजय कैंप (दक्षिण पुरी) में एक नया लर्निंग सेंटर खोला गया है. एक्शन इंडिया की साझेदारी से यह सेंटर दिल्ली के संजय कैंप की ऐसी किशोरियों के लिए है जिनका किन्हीं कारणों से स्कूल छूट गया है.

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